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ओ बसंत

ओ बसंत तुम आना मेरे अंगना  खिली कली कचनार,, कोमल मृदुल  गात,,, जरा ठिठकना, झरता   हर सिंगार  चुन चुन भर लूं हाथ ओ बसंत तुम आना... ठंडी शीतल है रात, ठिठुर रहे हैं गात,, कटती कैसे है रात तुम ही समझना। ओ बसंत थोड़ा सा ठहरना मेरे अंगना... अभी तो हुई है प्रात, बौराई अमिया की डाल,, सुना रही कोयल गान,,, झूमे पीपल पात,,, बैठी हूं पिया के साथ मन मे अभी कुछ बात, तुम साथ ही रहना। ओ बसंत तुम रूकना... महकी महकी है रात, जूही बेला के साथ,, तुम भी महकना। बसंत जब आना.... खुशियों की सौगात  अपने संग लाना बसंत जब आना।। -----मोनिका प्रसाद